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राष्ट्रीय जैन शिक्षक सम्मेलन एवं राष्ट्रीय विद्वत् संगोष्टी


११ वॉ वार्षिक महोत्सव 
राष्ट्रीय जैन शिक्षक सम्मेलन एवं राष्ट्रीय विद्वत् संगोष्टी 
दिनांक २२-२३-२४-२५ मार्च २०१४ 
 
स्थान : ज्ञान सागर गुरुकुल, बरनावा (बागपत) मेरठ, बड़ौत हाईवे 


मंगल विहार


परम पूज्य राष्ट्र संत तपोनिधि भक्तवत्सल आचार्य श्री 108 ज्ञान सागर जी महाराज जी महाराज का मंगल विहार कल दोपहर 2:00 बजे बरनावा से बिनोली के लिए होगा


प्रवचन

I am going to tell the story of 'Rakshabandhan' in jainism. Long back, at the time of the 14th tirthankar Shree Anantnath Swami Bhagwan, there was a dharmatma king ruling with his wife in the Ujjaini nagri.The king had 4 Brahmin ministers named:- Bali, Namuchi, Brahaspati & Prahlad.These ministers were orthodox followers of the vedas & were strictly against the jain faith..One day, in the outskirts of Ujjain, Akampanacharya, who was a digamber jainaachaarya ,came with the his 700 shishys(munis)

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